विज्ञान का एक अद्भुत आविष्कार टेलीविजन आविष्कार के बारे में जाने।।

                                                                    

       

बच्चो, क्या आप सभी वर्तमान समय में अपनी दुनिया टेलीविजन के बिना सोच सकते हैं? नहीं न! आज यह मनोरंजन एवं ज्ञान का मुख्य केंद्र बन चुका है। टेलीविजन पर आप अपने प्रिय कार्टून कार्यक्रम देखते हो। ज्ञान- विज्ञान एवं देश-विदेश की महत्त्वपूर्ण खबरें टेलीविजन के द्वारा ही प्राप्त होती हैं । 

देखा जाए तो यह विज्ञान का एक अद्भुत आविष्कार है। इसको हिंदी में 'दूरदर्शन' कहा जाता है। दूरदर्शन, यानी कि वस्तुओं एवं चित्रों के दूर से दर्शन कराने वाला यंत्र । है न बेहद रोचक। टेलीविजन का आविष्कार वैज्ञानिक जे.एल. बेयर्ड ने 25 जनवरी, 1926 को किया था। इस प्रकार सैकड़ों-हजारों वर्षों के स्वप्न को जे.एल. बेयर्ड ने सच कर दिखाया था। 

प्रारंभ में इसमें केवल श्वेत-श्याम चित्र आते थे; लेकिन आज तो टेलीविजन में न केवल रंग-बिरंगे चित्र देखे जा सकते हैं, बल्कि 3-डी तकनीक और अन्य तकनीकों के माध्यम से टेलीविजन में दिखने वाली वस्तुएँ एकदम सजीव-सी जान पड़ती हैं । 

टेलीविजन पर कार्यक्रमों के प्रसारण में संचार उपग्रहों की मदद ली जाती है। अब तो प्रसारण डिजिटल हो गए हैं । इस कारण दर्शक टेलीविजन पर बिल्कुल साफ-सुथरे चित्र देख सकते हैं। पहले टेलीविजन पर केवल कुछ ही कार्यक्रम आते थे, लेकिन वर्तमान समय में तो इतने अधिक निजी चैनल, न्यूज चैनल और कार्टून चैनल आ गए हैं कि दर्शक समझ ही नहीं पाते कि क्या देखें और क्या छोड़ें! टेलीविजन ने लोगों की मनोरंजन की दुनिया को बदलकर रख दिया। 

जब टेलीविजन नहीं था तो लोग अपना मनोरंजन बाहर खेले जाने वाले खेलों, गीत-संगीत एवं नृत्य में व्यतीत करते थे; किंतु टेलीविजन के बाद से यह बेहद कम हो गया। जिस तरह हर वस्तु के उपयोग एवं दुरुपयोग देखने को मिलते हैं, उसी तरह टेलीविजन से जहाँ कुछ लाभ हैं, वहीं इसके नुकसान भी बहुत हैं।

टेलीविजन पर केवल उपयोगी कार्यक्रम ही देखने चाहिए। विद्यार्थियों को तो एक दिन में मात्र आधे घंटे तक ही टेलीविजन देखना चाहिए। अधिक देर तक टेलीविजन देखने से आँखों पर बुरा असर पड़ता है और नजर कमजोर हो जाती है। टेलीविजन पर हिंसक कार्यक्रम देखने से भी बचना चाहिए। 

इसमें विद्यार्थियों को ज्ञान-विज्ञान, चित्रकला एवं मनोरंजक कार्यक्रम देखने चाहिए और इस पर पूरी तरह निर्भर नहीं होना चाहिए। टेलीविजन समाज के लिए एक बहुत महत्त्वपूर्ण आविष्कार है। इस आविष्कार का दुरुपयोग रोकना पूरी तरह से हम सभी की जिम्मेदारी है। प्रत्येक व्यक्ति को महत्त्वपूर्ण वस्तुओं का उपयोग समझदारी से करना चाहिए।

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