विश्वप्रसिद्ध आविष्कारक एवं चित्रकार लियोनार्डो दविंची के बारे में जाने ।।
प्राख्यात आविष्कारक, चित्रकार, मूर्तिकार, चिंतक व अद्भुत प्रतिभा के धनी लियोनार्डो द विंची का जन्म 15 अप्रैल, 1452 को इटली के विंची नामक गाँव में हुआ था। जब बालक विंची अपने चाचा के साथ अपने खेतों में जाता तो हर प्राकृतिक चीज जैसे पक्षी, झरना आदि के बारे में सवाल करता था और धीरे-धीरे सभी के चित्र बनाने लगा था।
ज्यादा-से-ज्यादा चित्र बनाने के लिए उसने विधियों और उपकरणों का आविष्कार प्रारंभ किया। 15-16 वर्ष की उम्र में सर पियरो अपने बेटे को फ्लोरेंस ले गए, जहाँ पर उन्होंने प्रख्यात चित्रकार वीरोचियो के स्टूडियो में लियोनार्डो के प्रशिक्षण की व्यवस्था की।
प्रशिक्षु लियोनार्डो ने अपनी ऐसी प्रतिभा का प्रदर्शन किया कि गुरु वीरोचियो को चित्रकला से संन्यास लेना पड़ा। फ्लोरेंस में रहने और काम करने के बाद लियोनार्डो ने मिलान की ओर रुख किया, जहाँ पर लुडविको सोर्जा का राज्य था।
लियोनार्डो ने लुडविको के लिए अनेक हथियार व विधियाँ जैसे मजबूत पुल, पत्थर फेंकने वाली मशीनें आदि तैयार की। लियोनार्डो के ज्यादातर आविष्कार या तो स्केचों तक सीमित रह गए या वे मॉडलों के रूप में ही रहे और बाद में नष्ट हो गए।
उन्होंने लिखने की एक अद्भुत कला विकसित की, जिसे जब शीशे के सामने रखा जाता था तब सीधे-सीधे पढ़ा जा सकता था। उन्होंने पक्षियों के शरीर की चीर-फाड़ भी की और यह जानने का प्रयास किया कि आखिर ये पक्षी उड़ते कैसे हैं। एक बार छत को पेंट करते समय उन्होंने आर्कमिडीज के स्क्रू को उलटा करके उड़ने की कल्पना कर डाली।
उन्हें लगा कि यदि इस स्क्रू के माध्यम से हवा ऊपर की ओर फेंकी जाए तो अवश्य ही व्यक्ति ऊपर उठता चला जाएगा। हवाई जहाज का मॉडल आर्कमिडीज स्क्रू के आधार पर तैयार किया। उन्होंने पैराशूट का मॉडल तैयार किया। हेलीकॉप्टर के भी डिजाइन तैयार किए। शांति काल में लियोनार्डो ने सुंदर-सुंदर तस्वीरें बनाईं।
उनकी मोनालिसा की तस्वीर आज भी मिसाल है। उन्होंने तौलने की स्वचालित मशीन तैयार की। पानी की घड़ी, आर्द्रतामापी उनके अन्य आविष्कार थे। मजाक करने, लोगों को डराने के लिए भी उन्होंने उपकरण व युक्तियाँ तैयार की।
साँड़ की ते फुलाकर बैलून का रूप देना, डरावने प्राणी का रूप देना आदि उनके शौक थे। लियोनार्डो ने शांति वार्ताओं के लिए भी ऐतिहासिक यंत्र व युक्तियाँ तैयार की। उन्होंने एक यंत्र मानव (रोबोट) तैयार किया, जिसने कुछ कदमों की यात्रा की और फिर अपना सीना खोलकर दिखाया, जिसमें अंदर लिली के फूल थे। 2 मई, 1519 में उनका निधन हो गया।

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