महान क्रन्तिकारी चंद्रशेखरआजाद
दोस्तों, चंद्रशेखरआजाद देश के ऐसे महान क्रन्तिकारी थे,जिन्होंने जीवन- पर्यत अंग्रेजो के हाथ न आने किकसम खायी थी । इसलिए जब ये अंग्रेजो से घिर गए तोइन्होने अंतिम समय में खुद को गोली मारकर
अपने प्राणों कि आहुति दे दी/ इनका जन्म 23 जुलाई, 1906को हुआ था। इनका प्रारंभिक जीवन आदिवासी छेत्र में बीता था , इसलिए इन्होने आदिवासी बच्चो के साथधनुष वान चलाये। बचपन से ही धनुष चलने के
कारण ये निशेनेवाज़ी में भी परंपरागत हो गए थे। सन 1919 में हुए अमृतसर के जलियावाला बाग़ नर संहार ने देश के नवयुवको का खून खोल दिया । चंद्रशेखरआजाद उस समय पढाई कर रहे थे असहयोग
आन्दोलोंन के समय इनकी उम्र मात्र 15 वर्ष थी उस दौरान इन्हें गिरप्तारकरके जब मैंजीस्ट्रेट के सामने जब लाया गया तो इनसे अपना नामपूछा गया तो दोस्तों आपको सुन के बड़ा गर्व महसूस होगाइसने अपना नाम
आजाद कहा और पिता का नाम पूछा गया तो कहा सवतंत्रता और सबसे प्रिय स्थान जब पूछा गया तो जेल बताया तभी से दोस्तों ये आजाद नाम से जाने लगे सन 1922 में इनकी मुलाकात रामप्रशाद बिस्मिल से हुई
थी । एक बार चन्द्र शेखर आजाद ने जलती हुई मोमबत्ती से अपना हाथ तब तक नही हटाया था जब तक कि इनकी त्वचा जल न गयी । इस घटना के बाद सेबिस्मिल इनसे बोहोत ज्यादा प्रभावीत हुए । दोस्तों चंद्रशेखर
एक नए भारत का निर्माण करना चाहते थे तथा ये अनेक क्रांतिकारियों केसाथ मिलकर देश को आजाद करना चाहते थे इसलिए ये सन 1925में काकोरी ट्रेन डकेती में भी शामिल हुए थे । दोस्तों काकोरी कांड के
बादअंग्रेज भारतीय क्रांतिकारियों से बेहद डर गये थे और उनको दोषी मानते हुएमौत कि सजा दी गयी लेकिन चन्द्र शेखर आजाद अंग्रेजो के हाथ नही आये जब 27 फरवरी , 1931 को अंग्रेज को यह जानकारी
मिली कि चंद्रशेखर आजाद अल्फ्रेड पार्क में है। सिपाहियों ने पार्क को चारो तरफ घेर लिया पर चन्द्र शेखर खुद का बचाव करते हुए बुरी तरह घायल हो गए और जब इन्हें येएहसास हो गया कि अंग्रेजो के चुंगल से
निकलना अब मुश्किल है तो इन्होनेपिस्तौल में बची अंतिम गोली खुद पर ही चला दी और हँसते हँसते मौत को गले लगा लिया। दोस्तों चंद्रशेखर भारत के एक ऐसे क्रन्तिकारी थेजिन्होंने कम उम्र में ही अपना सबकुछ
देश के लिए न्योछावर कर दिया था।दोस्तों ऐसे ही महान क्रांतिकारियों के बलिदान के कारण हमारा देश आजाद हो पाया।


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