झारखंड के प्रसिद्ध जिले ( खूटी )

                                                                                                                          

झारखंड राज्य का जिला खूटी दक्षिण छोटा नागपुर डिवीजन में है और राज्य के चौबीसजिलों में से एक है           इसे 12 सितंबर, 2007 को राँची जिले से अलग किया गया था।

जनगणना 2011 के अनुसार यह जिला झारखंड के सभी जिलों में सबसे कम जनसंख्या मेंद्वितीय स्थान पर, लोहरदगा जिले के बाद आता है। यहाँ पर पुरुषों की आबादी 52 प्रतिशतऔर महिलाओं की 48 प्रतिशत है। इस जिले की औसत साक्षरता दर 69 प्रतिशत है।                                                                                                       यहाँ पुरुष साक्षरता 75 प्रतिशत और महिला साक्षरता 61 प्रतिशत है। खूटी जिले को मुख्यतयाबिरसा आंदोलन की गतिविधि के केंद्र के रूप में जाना जाता है।

 इस जिले में एक गाँव हैउलीहातू, जो झारखंड के 'धरती आबा' बिरसा मुंडा का पैतृक गाँव है। यहाँ पर एक सिविलअस्पताल भी है, जिसमें जिले के रोगियों का इलाज किया जाता है। खूटी जिला झारखंड केअन्य जिलों की तरह ही आपसी सौहार्द और सहृदयता के लिए जाना जाता है।

इस जिले में अधिकांश जनजातियाँ निवास करती हैं। ये पर्यावरण की रक्षाकरने में सबसे आगे रहती हैं।             उन्हें अपने जीवन की जरूरतों के लिए बेहद संघर्षऔर मेहनत करनी पड़ती है।                                             यहाँ के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती करना ही है। ये लोगधान, मडुवा, उरद, सरगुजा आदि खरीफ फसलों की खेती करते हैं। इसके साथ ही लाख कीभी खेती बेर एवं कुसुम के पेड़ में की जाती है।                                       सूंटी जिला झारखंड में सबसे अधिक लाखकी खेती करने के लिए प्रसिद्ध है। लाह एक प्राकृतिक पॉलीमर यानी कि रेसिन है, जो एकछोटे से कीड़े केरिया लाक्का या केर से प्राप्त किया जाता है ।                                                       इस कीड़े को मुख्यत: इसी कार्यके लिए पलाश, कुसुम और बेर की डाली पर पाला पोसा जाता है । यह खेती इस जिले के लोगों के लिए कमाई का बहुत अच्छा जरिया है। खूटी पंचायत में कुल 12 प्रखंड हैं।

खूटी जिले में कई जातियों, पंथों और संप्रदायों के लोगों का घर है। यहाँ पर ये लोग त्योहारों को भी बड़ी धूमधाम से नाचते गाते हुए मनाते हैं  कई स्थानीयत्योहार जैसे फाल्गुन, सरहुल, दसैन, टुसू, करम आदि के समय ये नृत्य करते हैं ।                                                                                                                                                                   यहाँ पर घूमनेके लिए भी अच्छे स्थान हैं । यहाँ पर पंचघाघ प्रपात है। यह छूटी-चाईबासा के रास्ते में छूटी। लगभग 15 कि.मी. दूर पड़ता है। यहाँ पाँच झरने ऊँचे स्थानों से निकलते हैं।                                                                  यहाँ परपर्यटक झरने के पानी में मस्ती से स्नान करते हैं। यहाँ पर डियर पार्क भी है।                                               डियर पार्क मेंबच्चों के लिए कई उद्यान और खेलने के लिए पार्क हैं । यहाँ का मुख्य आकर्षण पार्क सफारीहै।  झूटी के पास ही अंगराबाड़ी मंदिर भी बेहद प्रसिद्ध है।                                                                                      इस मंदिर का नाम ऋषि शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा बदलकर 'अमरेश्वर धाम' कर दिया गया है। यहाँ का सेंट माइकल चर्च भी बहुत प्रसिद्ध है ।छूटी जिला झारखंड के मुख्य जिलों में से एक है।


कोई टिप्पणी नहीं

Blogger द्वारा संचालित.