स्नान करने से क्या होता है ?
★ स्नान करने से क्या होता है ?
स्नान करना एक दैनिक क्रिया है। स्नान करने से शरीर स्वच्छ हो जाता है मानसिक क्रिया दुरूस्त रहती है। पूजा-पाठ में मन लगता है। चित शान्त रहता है। कुछ लोग कहते है कि 'मन चंगा तो 'कठौती में गंगा' अर्थात् मन पवित्र है
तो सभी कुछ पवित्र है। जब मन ही पवित्र न हो तो गंगा, यमुना, सरस्वती या कावेरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से क्या लाभ? उन लोगों का कथन लगभग सत्य भी है। मैंने 'लगभग' शब्द का प्रयोग इसीलिए किया है कि उनका कथन सत्य तो है किन्तु पूर्ण रूप से नहीं क्योंकि स्नान करने से तन (शरीर) शीतल (ठंडा) हो जाता है।
परिश्रम से उत्पन्न हुई। थकान नष्ट हो जाती है और मन शीघ्र ही एकाग्र हो जाता है तथा पूजा-पाठ भजन-कीर्तन में मन लगता है। फर्ज कीजिए आप थके हुए हैं और आप पूजा करने बैठ गये । थकान से आपका बुरा हाल हुआ जा रहा है तो आपका मन कदापि पूजा करने में नहीं लगेगा या फिर सिर दर्द कर रहा है तो भी आप पूजा पाठ नहीं कर सकेंगे ।
मानता हूँ आपका मन पवित्र है किन्तु शरीर ही साथ नहीं दे रहा है। तो आप पूजा पाठ कैसे करेंगे ।
★ क्या इसका कोई वैज्ञानिक पक्ष भी है ?
वैज्ञानिक दृष्टि से भी स्नान करना अति आवश्यक है। स्नान करने से शरीर से चिपके कीटाणु निकल जाते हैं जिसके शरीर रोगमुक्त हो जाता है
तथा साथ ही साथ शरीर से निकले पसीने (जल) की पूर्ति भी स्नान करने से हो जाती है। शरीर के रोमकूपों (रोयें की जड़) से पानी शरीर में प्रवेश करता है जिससे शरीर की शुष्कता नष्ट हो जाती है और शरीर के साथ-साथ मन भी प्रफुल्लित हो जाता है।
कुछ लोग कभी-कभी भोजन करने के बाद स्नान करते हैं। यह वैज्ञानिक दृष्टि से पूर्ण रूप से गलत है क्योंकि भोजन के पश्चात् हमारे शरीर की आँते भोजन पचाने के कार्य में लग जाती हैं उसके तुरन्त बाद स्नान करने से शरीर शीतल हो जाता है और भोजन पचने का कार्य रूक जाता है।

कोई टिप्पणी नहीं